कब है पुत्रदा एकादशी व्रत? संतान प्राप्ति के लिए करें ये खास उपाय, जानें सही तिथि

हिन्दू धर्म में हर तिथि हर व्रत का अलग-अलग महत्व है. साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है. एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में धार्मिक मान्यता है कि एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही सभी मन्नते पूरी होती हैं. इस दिन किया गया व्रत अनेक फल की प्रप्ति कराता है.
कब मनाई जाएगी साल की पहली एकादशी 
वैदिक पंचांग के अनुसार साल की पहली एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी तिथि की शुरुआत 9 जनवरी दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगी. इसका समापन अगले दिन यानी 10 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 43 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को ही रखा जाएगा. इस एकादशी को वैकुंठ एकादशी भी कहते हैं.

पुत्रदा एकादशी का महत्व 
शास्त्रों के अनुसार पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए रखा जाता है. ऐसे में जिन वैवाहिक जोड़ों को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है, उन्हें यह व्रत जरूर रखना चाहिए. पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है. पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु संग लक्ष्मी जी की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और संतान की प्राप्ति होती है.
व्रत कैसे रखें?
एकादशी व्रत के दिन अन्न का सेवन वर्जित है। जो व्रत नहीं रखते, उन्हें भी इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए।
इस दिन बाल, नाखून और दाढ़ी कटवाने से बचें।
ब्राह्मणों को दान देना एकादशी व्रत के दिन शुभ माना जाता है।
व्रत का पारण करने के बाद अन्न का दान करना भी अत्यंत शुभ होता है।"

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